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Welcome to The Republic of  Philosophy

इस ब्लॉग का मुख्य उद्देश्य वही है जो श्रीअरविंद के “आर्य” पत्रिका का था |  

इस ब्लॉग  में प्रकाशित होगा |

  • चिंतनशील दर्शन का समन्वयात्मक अध्ययन |
  • प्राचीन मूल-पाठों के अनुवाद तथा भाष्य |
  • तुलनात्मक धर्म का अध्ययन |
  • आतंरिक संस्कृति तथा आत्म-विकास के व्यवहारिक तरीके |
  • प्राचीन भारतीय वैदिक संस्कृति का पुनरुत्थान व आर्ष वाङ्मय के तत्वज्ञान का समन्वयात्मक अध्ययन ।

यह ब्लॉग विशुद्ध दार्शनिक व् वैज्ञानिक अध्यात्मवादी ब्लॉग है |

यह अपने सामने दोहरा आदर्श रखती है :-

१. जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याओं का विधिवत अध्ययन ;


२. ज्ञान का विस्तृत समन्वय , पूर्व तथा पश्चिम –दोनों देशों की विविध धार्मिक परम्पराओं में सामंजस्य | उसका तरीका यथार्थता से जुडा होगा –वह ऐसी यथार्थता होगी जिसमे बुद्धि तथा ऐसे वैज्ञानिक अनुशासन की एकता होगी जिसमे अंतर्भासात्मक अनुभूति का पुट होता है |

यह ब्लॉग उन विभिन्न विचारधाराओं वाले समूहों व व्यक्तियों का संदर्भ बनने में भी सहायक हो सकती है जो इसी समान प्रेरणा को लेकर चलते हैं |   

इस ब्लॉग के उपर्युक्त मुख्य विषयों के अतिरिक्त यहां कुछ निम्न विषयवस्तुओं पर भी आलेख प्रकाशित होंगे:
 
  • प्राचीन भारतीय दर्शनशास्त्र (वेदान्त, योग, सांख्य, वैशेषिक, मीमांसा और न्याय)
  • बौद्ध और जैन दर्शन
  • प्राचीन ग्रीक दर्शन (सुकरात, प्लेटो , अरस्तु, डायोजिनीज , जेनो व अन्य)
  • आधुनिक पाश्चात्य व समसामयिक दर्शन (डेकार्ट, स्पिनोजा, लाइबनीज़, जॉन लॉक, बर्कले, ह्यूम, काण्ट, नीत्शे व अन्य बुद्धिवादी व अनुभववादी दार्शनिक की मीमांसा)
  • चीन के दार्शनिक
  • प्राचीन भारतीय शास्त्रो व ग्रंथो (वेद, उपनिषद, पुराण, तंत्र, आगम, स्मृति, गीता व ऐतिहासिक ग्रंथ रामायण और महाभारत आदि) के ऐतिहासिक, दार्शनिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, व वैज्ञानिक विश्लेषण व समन्वय
  • अध्यात्म विज्ञान और वैज्ञानिक अध्यात्मवाद
  • तुलनात्मक दर्शन (प्राच्य व पाश्चात्य)
  • तुलनात्मक धर्मदर्शन 
  • इतिहास (भारतीय व वैश्विक)
  • समाजशास्त्र व विज्ञान
 
कुछ अन्य विषय भी समय समय पर प्रकाशित होते रहेंगे समसामयिक मांग के अनुसार ।
 
मुझे आशा है कि आप सभी को इन सभी विषयों की समन्वयात्मक मीमांसा व विश्लेषण पसंद आएगा और आपका सहयोग मिलेगा ।
 
धन्यवाद,
 
चन्दन प्रियदर्शी 
The object which this Blog set before itself is same as the magazine “Arya” published by Sri Aurobindo.
 
The Blog will publish:
  •  Synthesized studies in speculative philosophy.
  • Translations and commentaries of ancient texts.
  • Practical methods of inner culture and self development.
  • A systematic and synthesized study of Ancient Indian Vedic Philosophy & Culture and Texts. 
 
The blog is review of the pure philosophy and scientific-spirituality.
 
The object which it has set before itself is two fold:- 
 
1. A systematic study of the highest problems of existence;
 
2. The formation of a vast Synthesis of knowledge , harmonizing the diverse religious traditions of humanity occidental as well as oriental. Its method will be that of a realism , at once rational and transcendental , – a realism consisting in the unification of intellectual and scientific discipline with those of intuitive experience.
 
This blog will also serve as a reference for the various groups and societies founded on the same inspiration.
 
Apart from above goals and primary objectives of the blog, the articles/ analysis shall be published on below mentioned topics:-
  •  Ancient Indian Traditional Philosophy (Vedanta, Y oga, Samkhya, Vaisheshika, Meemansa, Nyaya)
  •  Philosophy of Gautam Buddha and Lord Mahavira Jain.
  •  Ancient Greek Philosophy (Socrates, Plato, Aristotle, Diogenes etc…)
  • Modern Western & Contemporary Philosophy ( Descartes, Spinoza, Leibnitz, John
  • Locke, Berkeley, Hume, Kant, Nietzsche, and others Rational and Realist Philosophers)
  • Chinese Philosophy etc…
  • Historical, Philosophical, Social, Spiritual and Scienti}c Analysis of Ancient Indian
  • Scriptures (Vedas, Upanishads, Puranas, Tantra, Agama, Smriti, Historical Treaties etc..)
  •  Spiritual Science and Scientific Spirituality
  •  Comparative Philosophy (Oriental and Occidental)
  •  Comparative Religion
  •  History
  •  Sociology and Social Science
 
There would some other topics also be included on as and when required basis.
 
I trust you all will love the articles published here and support us spreading the noble thoughts across the globe, hut to hut and heart to heart.
 
Thank You,
 
Chandan Priyadarshi

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