प्राणमयकोश ― ध्यानात्मक प्रयोग कक्षा (17/02/2019)

? ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो नः प्रचोदयात् ?

? प्राणमयकोश _ ध्यानात्मक प्रयोग कक्षा _ 17/02/2019 _ प्रज्ञाकुंज सासाराम_ पंचकोशी साधना प्रशिक्षक श्री लाल बिहारी सिंह (बाबूजी) एवं आल ग्लोबल पार्टिसिपेंट्स ?

? वीडियो अवश्य रेफर करें ?

? बाबूजी:-
? ऐश्वर्या, पुरूषार्थ, तेज, ओज एवं यश प्राण की उपलब्धियाँ हैं। प्रशंसा/यश/प्रतिष्ठा फिसलन ना बनें इसके लिए एकांत चिंतन मनन, सद् साहित्य (वेद, उपनिषद्) स्वाध्याय और सत्संग की व्यवस्था हमेशा बनाये रखें।

? प्राण आत्मा का अस्त्र है। प्राण जड़ और चेतना का मिश्रण। प्राण का मंत्र गायत्री महामंत्र है।

? प्राणवान ही पूजनीय होते हैं। वीर भोग्या वसुंधरा।

? वर्तमान मे हीट एनर्जी पर विज्ञान शोधरत और अनेकानेक उपलब्धियाँ मिली है। फ्यूचर में विज्ञान की एक फैकल्टी कोल्ड एनर्जी पर शोधरत होगा।

? वीर @ प्राणवान मनुष्य योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते हैं।

? प्रज्ञावतार युगऋषि श्रीराम का कथन – आत्म निर्माण करने वाले ही विश्व निर्माण मे भूमिका सुनिश्चित करेंगे। महाकाल स्वयं एकलव्य का अंगूठा ले वापस आये हैं, बस पुरूषार्थ मात्र की आवश्यकता है।

? हाहाकार मचा के बानर, कूद चूके लंका के अंदर। ?

? रूपांतरण की आवश्यकता। अंगूलीमाल, रत्नाकर जैसे आततायी का महान संत मे रूपांतरण। ट्रांसफार्मर बनें।

? गहरे पानी में डुबकी लगाकर ही मोती पाया जाता है। अतएव साधना गहन हो

? आहार शुद्धि का प्राण के ऊर्ध्व गमन महती भूमिका। किसी भी अवस्था में गायत्री महामंत्र का चिंतन मनन प्राणवान बनाते हैं।

? डाॅक्टर राजेन्द्र प्रसाद ऐकेडमिक सुपर्ब होने का राज वो बताते थे कि अध्ययन क्रम में कोई भी टॉपिक हो कम से कम 30 बार पढ़ते थे।

? आचार्य विनोबा भावे 30 वर्ष तक उपनिषदों का अध्ययन किया।

? स्वाध्याय मंडल बनें और चर्चायें हों।

? आकाशीय विद्या पाने हेतू रिसीवर बनें।

? ॐ शांति शांति शांति

― संकलक – विष्णु आनन्द जी

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