अन्नमय कोश : Miracles of Vitamin D – 23/02/2019

?23/02/2019_Saturday _ प्रज्ञाकुंज

सासारामपंचकोशी साधना प्रशिक्षक बाबूजी “श्री लाल बिहारी सिंह एवं आल ग्लोबल पार्टिसिपेंट्स”

? ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो नः प्रचोदयात् ?

? अन्नमयकोश Miracles of Vitamin D _ Teacher Dr Anand Dhingra?
? वीडियो अवश्य रेफर करें ?
? सर्वप्रथम प्रज्ञाकुंज सासाराम से शोधरत साधक समूह का पंचकोशी साधना का योगा पैकेज डेमो।

? डा0 आनन्द धींगरा भैया:

? सूर्य सारे ऊर्जा का स्रोत।
? प्रकाश संश्लेषण (Photo Synthesis) क्रिया के बिना ना हमें आक्सीजन मिलेगा ना भोजन।
? विटामिन डी कमी से बाॅडी मे हमेशा थकावट रहती है एवं दर्द भी रहता है। शहरी क्षेत्र मे अधिकांशतः लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं। मसल्स क्रैम्प, ज्वाइंट पेन, ओबेसिटी, कब्ज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कैंसर, माहवारी संबंधित रोग, बांझपन, डिप्रेशन, अल्जाइमर, स्किन डिजीज, आइ क्यू लेवल कम होना, बच्चे में अस्थमा, गर्भावस्था में डायबिटीज की बीमारी, बढ़ती उम्र मे डायबिटीज, सेक्सुअल डिसऑर्डर्स इत्यादि रोग विटामिन डी की कमी से हो सकते हैं।
? Sun light exposure विटामिन डी का सबसे प्रभावी सर्वथा हानिरहित स्रोत है। गोरे लोगों के लिए 15 मिनट का, सामान्य भारतीय लोगों के लिए 30 मिनिट्स का सन लाइट एक्सपोजर आवश्यक। जिन लोगों का कलर जितना डार्क होगा उनके सन लाइट एक्सपोजर का समय उसी अनुपात में ज्यादा होगा। जिस भी समय सूर्य की किरणें आपको आनंद देती हैं आप इसके एक्सपोजर का आनंद ले सकते हैं।
? अपने बाॅडी में विटामिन डी का लेवल हम ब्लड टेस्ट से पता कर सकते हैं
? डाॅक्टर साहब ने विटामिन डी के सप्लीमेंट देकर डिप्रेशन के बहुत सारे रोगी को क्योर किया है।


? बाबूजी:-

? पंचकोशी साधना गायत्री महामंत्र का प्रैक्टिकल। सरल सहज सर्वथा हानिरहित साक्षात संजीवनी।
? तन्मात्रा साधना सिद्ध हो जाये तो मेडिटेशनल प्रोसेस से हम विटामिन डी ले सकते हैं।
? महामुद्रा मस्तिष्क को कूल तो बाॅडी को एक्टिव रखता है: इसे सिद्ध कर लिया जाए तो बाॅडी के सोलर प्लेटलेट्स एक्टिवेट हो जाते हैं और किसी भी समय हम विटामिन डी ग्रहण कर सकते हैं। मेडिटेशन जितना गहण होगा प्रभाव उतना ही अच्छा होगा।
? अल्फावायलेट किरणें आत्मज्ञान की किरणें। ब्रह्ममुहुर्त में सविता ध्यान से ग्रहण कर सकते हैं।

? ॐ शांति शांति शांति ?

संकलक – विष्णु आनंद जी

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