🌞 09/03/2019_प्रज्ञाकुंज सासाराम_ गायत्री गीता पंचकोशी साधना प्रशिक्षक बाबूजी श्री लाल बिहारी सिंह एवं आल ग्लोबल पार्टिसिपेंट्स। 🙏

🌞 ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो नः प्रचोदयात् 🌞
🙏 वीडियो अवश्य रेफर करें 🙏

🌞 बाबूजी:-

🌻 जप, ध्यान, स्वाध्याय, सत्संग उपासना के अनिवार्य अंग। मंत्र मतलब परामर्श @ सलाह। महामंत्र मतलब महा सलाह। इसकी अनदेखी कष्ट का कारण बन सकती है। उपासना, साधना, अराधना। प्रैक्टिकल एंड मोर प्रैक्टिकल। पचाना (डाइजेशन) अत्यंत महत्वपूर्ण है।

🌻 भर्गो – पापनाशक।दुष्प्रवृति उन्मूलनाय। अपने को परत दर पर परत साफ करना होता है। जन्म जन्मांतर के संस्कार साथ चलते हैं। एक चिपकाव बन जाता है। वो आदतें जो शरीर मन और चैतना को कमजोर करती है उसे भुंजन कर त्याग दिया जाये। बंधन को ही छोड़ना है। समस्त दुःख का कारण पाप ही है। हित्भोक्, ऋत्भोक, मित्भोक। आओ लड़े स्वयं से, रोगों के राक्षसों से, भोगों एवं वासनाओं से। भर्ग का एक अर्थ बल भी होता है। गणेश का भर्ग विवेक, लक्ष्मी का भर्ग धन संपदा, शिव का भर्ग कल्याण।

🌻 देवस्य – देवत्व। दैवीय संपदा को धारण करें। देवत्व का अभिवर्द्धन संवर्द्धन। सत्प्रवृति संवर्द्धनाय।

🌻 धीमहि – धारण करें। याज्ञवल्क्य ऋषि कहते हैं भाग्यशाली वह है जो मनुष्य का अंतःकरण पा लेवें। अंतःकरण परिष्कृत। आत्मनिर्माण संसार की सबसे बड़ी सेवा है। पवित्रता को धारण करें। आदर्शो (भद्रता) का समुच्चय ईश्वर है। ( सत्य कड़वा होता है यह अधुरा सत्य है। सत्यं ब्रुयात् प्रियं ब्रुयात्। सत्य कड़वा है अर्थात बोलने का तरीका सही नही है। ईश्वर सत्य हैं तो ये कड़वा कैसे हो सकता है। सत्य को प्रिय तरीके से अर्थात् सही तरीके से रखें जैसे देवर्षि नारद किया करते थे।)

🌻 यो नः – मितव्ययिता। अपने पुरूषार्थ और धन को लोकसेवा मे जरूर लगावें।

🌻 प्रचोदयात् – सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। सर्वप्रथम स्वयं को सत्य मार्ग पर चलने हेतु प्रेरित करें। हनुमान जी के अंदर प्रचुर बल था, दबी पड़ी थी और जब जामवंत जी ने प्रेरणा दी तो पवन तनय बल पवन समाना पर्वताकार हो गये। देवर्षि नारद प्रेरणा का कार्य करते थे। गायत्री महामंत्र प्रेरणा का महामंत्र।

🌞 उस प्राण स्वरूप दुःखनाशक सुख स्वरूप श्रेष्ठ तेजस्वी पापनाशक देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अंतरात्मा मे धारण करें और वो हमे सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें 🌞

🌹 आत्मसुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है_। उपदेश अपने वाणी से नहीं वरन् अपने आचरण से प्रस्तुत की जाये। महापुरूष के पीछे संसार स्वयं स्वतः अनुगामी हो जाता है। जैसे गौतम बुद्ध, स्वामी राम कृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, प्रज्ञावतार युगऋषि श्रीराम।

🌹 प्रत्याहार, ध्यान, धारणा, समाधि की अवचेतन मन की सफाई की प्रक्रिया।

🌞 ॐ शांति शांति शांति 🙏

🐒 जय युगऋषि श्रीराम 🙏

संकलक – “श्री विष्णु आनन्द जी”

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