🌞 27/04/2019_प्रज्ञाकुंज सासाराम_ Experience Sharing by Participants  _ प्रशिक्षक बाबूजी “श्री लाल बिहारी सिंह” एवं आल ग्लोबल पार्टिसिपेंट्स। 🙏

🌞 ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो नः प्रचोदयात् 🌞

🙏 वीडियो अवश्य रेफर करें। 🙏

🌞 आदरणीय योगाचार्य सुरेन्द्र भैया द्वारा प्रज्ञायोग व्यायाम का परफेक्ट डेमोन्सट्रेशन।

🌞 आदरणीय योगा ट्रेनर लोकेश भैया ने प्राणमयकोश के बेसिक काॅन्सेप्ट पर कक्षा ली है:-

🌻 शरीर और आत्मा दोनो का कॉम्बिनेशन ह्युमन है। जड़ और चेतन दोनो के बीच जो कामन फैक्ट है वह प्राण है। अतः प्राणमयकोश की साधना अहम है इसकी साधना से अन्नमयकोश और मनोमयकोश दोनो की साधना मे मदद मिलती है।

🌻 प्राण के प्रकार के बारे मे बताया है। प्राण, अपान, व्यान, समान, उदान। पांच प्राण एवं पांच उपप्राण। प्राणमयकोश की साधना मे प्राणायाम, बंध एवं मुद्रा के अभ्यास आते हैं।

🌻 शरीर मे कही भी किसी रोग/अक्षमता का कारण प्राण की कमी होना है। प्राणायाम, बंध एवं मुद्रा के अभ्यास से हम प्राणवान बन रोगों का समूल नाश कर सकते हैं।

🌻 सिद्धि का मतलब वर्तमान युग मे मानसिक स्तर पर है। सामान्यत्या जिन जिम्मेदारी अथवा चुनौती को लोग लेने से लोग पीछे हटते हैं उन्हे स्वीकार कर क्रियान्वयन करना सिद्धि का द्योतक है।

🌻 भैया ने व्यक्तिगत अनुभव साझा किया है प्राणमयकोश की कोश की साधना से क्रोध पर नियंत्रण, प्लानिंग स्किल्स, लीडरशिप, तेजस्विता को पाया जाता है। हम समाधान का हिस्सा बन जाते हैं। यह केवल किताब के अध्ययन से नही मिलता है इसके लिए अभ्यास की आवश्यकता होती है।

🌻 विधि के साथ मत बंधिये, विधा के साथ बंधिये।

🌞 आदरणीय प्रथम बेंच शिक्षिका रीता दीदी:-

🌻 अनुभव जाहिर करने पर बल दिया है। अभिव्यक्ति @ अनुभव शेयरिंग मे कमी हमारे अभ्यास की कमी को दर्शाता है। पांच साल की पंचकोशी साधना प्रशिक्षक बनने की साधना है अतएव हमे अभिव्यक्ति वाले पक्ष को मजबूत बनाना चाहिए।

🌻 मानसिक संकल्प से सृष्टि की उत्पत्ति हुयी है। बिना इसके अन्नमयकोश और प्राणमयकोश की साधना संभव नही है। मन का संकल्प और अभ्यास को जब हम जोड़ देते हैं तभी सफलता मिलती है।

🌻 दीदी ने न्यास योग के बारे मे बताया है।

🌻 साधना जब पकती है तब ध्वनि ऊर्जा पर नियंत्रण होने लगती है और हम कम बोलने लगते हैं जरूरत के हिसाब से ही हम वाणी का उपयोग करते हैं।

🌞 आदरणीय अनुभा दीदी ने अन्नमयकोश एवं प्राणमयकोश की साधना से समग्र स्वास्थ्य को पाया है।

🌞 आत्मीय अमन भैया ने प्रश्नोत्तरी मे बताया की संसार हमारा मूल्यांकन भौतिक उपलब्धि के आधार पर करता है जबकि अध्यात्म जगत मे मूल्यांकन आत्मिकी स्तर पर होता है।

क्रियाविधि के साथ भावना का सन्निहित होना अनिवार्य है। अतः मुद्रा के क्रियात्मक पक्ष के साथ भावना को अवश्य जोड़ा जाये।

🌞 बाबूजी:-

🌻 अभिव्यक्ति मे झिझक होती है उसे दूर करने की ट्रेनिंग प्रज्ञाकुंज सासाराम के साधनात्मक सत्रो मे दी जाती है।

🌻 पांचो कोश की साधना एक साथ चलती है। प्राण विजीबल भी है और इनविजीबल भी। प्रज्ञा वाला प्राण इनविजीबल है।

🌻 अपना अनुभव ही असली कमाई है। और यह अपने स्थान पर महत्व रखता है और समय के साथ बदलता भी जाता है।

🌻 जब जैसा तब तैसा, नही जाने तो पंडित कैसा। हमे समाज के सभी वर्ग से सामंजस्य स्थापित करना है। अपनी तरफ से हम गलत ध्वनि ना निकाले और बाहर से कोई गलत ध्वनि आती है तो हम कैसे संतुलित रहे पाजिटिव रहे यह सीखना है। ईश्वर अच्युत भी हैं।

🌞 ॐ शांतिः शांतिः शांतिः 🙏
🐵 जय युगऋषि श्रीराम। 🙏

संकलन – श्री विष्णु आनन्द जी

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