🌞 05/05/2019_प्रज्ञाकुंज सासाराम_ मनोमयकोश _ प्रशिक्षक बाबूजी “श्री लाल बिहारी सिंह” एवं आल ग्लोबल पार्टिसिपेंट्स। 🙏

🌞 ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो नः प्रचोदयात् 🌞
🙏 वीडियो अवश्य रेफर करें। 🙏

🌞 आदरणीय मालविका शर्मा दीदी अमेरिका बोस्टन से, पंचकोशी योगा का डेमोन्सट्रेशन।

🌞 बाबूजी:-

👉 चेतनाया हि केन्द्रं तु मनुष्याणां मनो मतम्।
जायते महतीत्वन्तः शक्तिस्तस्मिन् वंशगते ।22।
(अर्थ: मनुष्यों मे चेतना का केंद्र मन माना गया है उसके वश मे होने से महान अन्तः शक्ति पैदा होती है।)

🌻 मनुष्य की चेतना का केंद्र मन है। बंधन और मुक्ति का कारण मन ही है। अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येन च गृह्यते। अभ्यास और वैराग्य से इस मन को नियंत्रित/ वश में किया जा सकता है।

👉 ध्यान त्राटक तन्मात्रा जपानां साधनैर्ननु।
भवत्यत्युज्वलः कोशः पावर्वत्यशे मनोमयः ।23।
(अर्थ: ध्यान, त्राटक, तन्मात्रा और जप इनकी साधना करने से हे पार्वती मनोमय कोश अत्यन्त उज्जवल हो जाता है। यह निश्चय है।)

🌻 जप, ध्यान, त्राटक एवं तन्मात्रा साधना। इन चारों के अभ्यास से मन को साधा जा सकता है। मनोमयकोश साधना से आभामंडल के औरा को बढ़ाया जा सकता है।

🌻 ज्ञान भी प्राण का एक रूप है। ज्ञान के संवर्धन को हम प्राण संवर्द्धन के रूप मे ले सकते हैं। प्रज्ञा बुद्धि हमे आत्मसाक्षात्कार तक ले जाती है।

🌻 प्रारंभ मे मन को साधने का अर्थ मन की चंचलता को शांत करना है। चेतन मन, अवचेतन मन एवं सुपर चेतन मन। मन के सभी आयाम को परिष्कृत करना है।

🌻 हमारे गुरूदेव युगऋषि श्रीराम कहते हैं संसार के सबसे फूहड़ से फूहड़ व्यक्तित्व को सम्मान देना सीखो। अगर आप ऐसा सीख गये तो आप अध्यात्मिकी मे प्रवेश पा गये।

🌻 अपने विचार समष्टि चेतना से जुड़ जाये तो इसे ही समाधि कहते हैं। तन्मात्रा साधना से हम संत कबीर दास की स्थिति को पा सकते हैं।

👉 ईशा वास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्‌।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्‌ ॥
(अर्थ: इस वैश्व गति में, इस अत्यन्त गतिशील समष्टि-जगत् में जो भी यह दृश्यमान गतिशील, वैयक्तिक जगत् है- यह सबका सब ईश्वर के आवास के लिए है। इस सबके त्याग द्वारा तुझे इसका उपभोग करना चाहिये; किसी भी दूसरे की धन-सम्पत्ति पर ललचाई दृष्टि मत डाल।)

🌻 हमे अपना ऐंगल आफ विजन ऐसा बनाना है की सभी जगह ईश तत्व के दर्शन हों। प्राणायाम हमारे ऐंगल आफ विजन को इस स्थिति मे ला देता है।

🌻 अज्ञानता @ लोभ, मोह एवं अहंकार जैसे फोड़े का आपरेशन ज्ञान से करना पड़ता है।

🌻 एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति। बस। एक ही ब्रह्म है दूसरा कोई नहीं।

🌻 जप के साथ ही साथ पंचकोश साधना चलता रहे अर्थात् जप का प्रैक्टिकल चलता रहे।

🌻 ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा। यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं सः बाह्यअभ्यंतरः शुचिः। ॐ पुणातु पुण्डरीकाक्षः पुणातुः।

यदि सोचने का तरीका शुद्ध @ पवित्र कर लिया गया तो वह किसी भी अवस्था मे अंदर और बाहर से शुद्ध है। बुद्धिमान व्यक्ति को नित गायत्री जप करती रहनी चाहिए।

🌻 देवता का अर्थ सब्जेक्ट। हे अर्जुन तु युद्ध भी कर और मेरा स्मरण भी कर। इनका चिंतन मनन हमे खास स्टेट मे ले जाता है।

🌞 ॐ शांति शांति शांति 🙏
🐵 जय युगऋषि श्रीराम। 🙏

संकलक – श्री विष्णु आनन्द जी

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