अथर्ववेद चतुर्थ काण्ड

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:40 – शत्रुनाशन सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ९०७. ये पुरस्ताज्जुह्वति जातवेदः प्राच्या दिशोऽभिदासन्त्यस्मान्।अग्निमृत्वा ते पराञ्चो व्यथन्तां प्रत्यगेनान् प्रतिसरेण हन्मि॥१॥हे जातवेदा अग्निदव! जो शत्रु...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:39 – सन्नति सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ८९७. पृथिव्यामग्नये समनमन्त्स आर्ध्नोत्।यथा पृथिव्यामग्नये समनमन्नेवा मह्यं संनमः सं नमन्तु॥१॥धरती पर अग्निदेव के सम्मुख समस्त प्राणी...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:38 – वाजिनीवान् ऋषभ सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् * ८९०. उद्भिन्दतीं सञ्जयन्तीमप्सरां साधुदेविनीम्।ग्लहे कृतानि कृण्वानामप्सरां तामिह हुवे॥१॥उद्भेदन (शत्रु उच्छेदन अथवा ग्रन्थियों का निवारण करने...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:36 – सत्यौजा अग्नि सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ८६८. तान्त्सत्यौजा: प्र दहत्वग्निर्वैश्वानरो वृषा।यो नो दुरस्याद् दिप्साच्चाथो यो नो अरातियात्॥१॥जो शत्रु हम पर झूठा दोषारोपण...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:35 – ब्रह्मौदन सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ८६१. यमोदनं प्रथमजा ऋतस्य प्रजापतिस्तपसा ब्रह्मणेऽपचत्।यो लोकानां विधुति भिरेषात् तेनौदनेनाति तराणि मृत्युम्॥१॥जिस ओदन को सर्वप्रथम उत्पन्न...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:34 – ब्रह्मौदन सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् इस सूक्त के देवता 'ब्रह्मौदन' हैं। लौकिक संदर्भ में यज्ञीय क्रम में संस्कारयुक्त जो अन्न दान...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:33 – पापनाशन सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ऋषि - ब्रह्मा, देवता - अग्नि, छन्द - गायत्री ८४५. अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घमग्ने॑ शुशु॒ग्ध्या र॒यिम्।अप॑ नः॒...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:32 – सेनासंयोजन सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ८३८. यस्ते मन्योऽविधद् वज्र सायक सह ओजः पुष्यति विश्वमानुषक्।साह्याम दासमार्य त्वया युजा वयं सहस्कृतेन सहसा सहस्वता॥१॥हे...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:31 – सेनानिरीक्षण सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ८३१. त्वया मन्यो सरथमारुजन्तो हर्षमाणा हृषितासो मरुत्वन्।तिग्मेषव आयुधा संशिशाना उप प्र यन्तु नरो अग्निरूपाः॥१॥हे मन्यो! आपके...

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