September 26, 2021

अथर्ववेद-संहिता

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:14 – स्वर्ज्योति प्राप्ति सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ६९३. अजो ह्य१ग्नेरजनिष्ट शोकात् सो अपश्यज्जनितारमग्रे।तेन देवा देवतामग्र आयन् तेन रोहान् रुरुहुर्मेध्यासः॥१॥ अग्नि ही 'अज' है।...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:13 – रोग निवारण सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ६८६. उत देवा अवहितं देवा उन्नयथा पुनः।उतागश्चक्रुषं देवा देवा जीवयथा पुनः॥१॥ हे देवगण ! हम पतितों...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:12 – रोहिणी वनस्पति सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् इस सूक्त में टूटे अंगों को जोड़ने एवं जले-कटे घावों को भरने के लिए 'रोहिणी' नामक...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:11 – अनड्वान् सूक्त

अथर्ववेद संहिताचतुर्थ काण्डम् अनड्वान् प्राणों को भी कहा गया अथर्व० ११.६.१०)। यह भाव इस सूक्त के संदर्भ में भी सटीक...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:10 – शङ्खमणि सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ६६०. वाताज्जातो अन्तरिक्षाद् विद्युतो ज्योतिषस्परि।स नो हिरण्यजाः शङ्खः कृशन: पात्वंहसः॥१॥ वायु, अन्तरिक्ष, विद्युत् और सूर्य आदि...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:09 – आञ्जन सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ६५०. एहि जीवं त्रायमाणं पर्वतस्यास्यक्ष्यम्।विश्वेभिर्देवैर्दत्तं परिधिर्जीवनाय कम्॥१॥ हे अञ्जन मणे ! आप प्राणधारियों की सुरक्षा करने...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:08 – राज्याभिषेक सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् प्राचीनकाल की परिस्थितियों के अनुसार अधिकांश आचार्यों ने इस सूक्त का अर्थ राजा परक किया है।...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:07 – विषनाशन सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ६३६. वारिदं वारयातै वरणावत्यामधि।तत्रामृतस्यासिक्तं तेना ते वारये विषम्॥१॥ वरणावती ओषधि में स्थित रस हमारे विष को...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:06 – विषघ्न सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ६२८. ब्राह्मणो जज्ञे प्रथमो दशशीर्षो दशास्यः।स सोमं प्रथमः पपौ स चकारारसं विषम्॥१॥ पहले दस शीर्ष तथा...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:05 – स्वापन सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ६२१. सहस्रशृङ्गो वृषभो यः समुद्रादुदाचरत्।तेना सहस्येना वयं नि जनान्स्वापयामसि॥१॥ सहस्र श्रृंगों (रश्मियो) वाला वृषभ (वर्षा करने...

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