राष्ट्रदेवी सूक्त

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:30 – राष्ट्रदेवी सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ८२३. अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः।अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा॥१॥(वाग्देवी का कथन) मैं रुद्रगण एवं वसुगणों के साथ भ्रमण...

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