राष्ट्र अभिवर्धन

अथर्ववेद-संहिता – 1:29 – राष्ट्र अभिवर्धन, सपत्नक्षयण सूक्त

अथर्ववेद-संहिता॥अथ प्रथमं काण्डम्॥ १२३. अभीवर्तेन मणिना येनेन्द्रो अभिवावृधे।तेनास्मान् ब्रह्मणस्पतेऽभि राष्ट्राय वर्धय॥१॥ हे ब्रह्मणस्पते ! जिस समृद्धिदायक मणि से इन्द्रदेव की...

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