शत्रुनाशन सूक्त

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:40 – शत्रुनाशन सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् ९०७. ये पुरस्ताज्जुह्वति जातवेदः प्राच्या दिशोऽभिदासन्त्यस्मान्।अग्निमृत्वा ते पराञ्चो व्यथन्तां प्रत्यगेनान् प्रतिसरेण हन्मि॥१॥हे जातवेदा अग्निदव! जो शत्रु...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 4:03 – शत्रुनाशन सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ चतुर्थ काण्डम् इस सूक्त में व्याघ्र, भेड़िया सर्प आदि घातक प्राणियों तथा चोर-लुटेरों आदि दुष्ट पुरुषों से बचाव...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 3:06 – शत्रुनाशन सूक्त

अथर्ववेद संहिता॥अथ तृतीय काण्डम्॥ इस सूक्त के प्रथम मंत्र में 'अश्वत्थ खदिरे अधि' वाक्य आता है। इस सूक्त के द्वारा...

अथर्ववेद – Atharvaveda – 2:22 – शत्रुनाशन सूक्त

अथर्ववेद संहिता॥अथ द्वितीय काण्डम्॥ २७३. चन्द्र यत् ते तपस्तेन तं प्रति तप यो३स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः॥१॥ हे चन्द्रदेव !...

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