शत्रुनिवारण सूक्त

अथर्ववेद – Atharvaveda – 3:27 – शत्रुनिवारण सूक्त

अथर्ववेद संहिताअथ तृतीय काण्डम् ५५३. प्राची दिगग्निरधिपतिरसितो रक्षितादित्या इषवः।तेभ्यो नमोऽधिपतिभ्यो नमो रक्षितृभ्यो नम इषुभ्यो नम एभ्यो अस्तु। यो३स्मान् द्वेष्टि यं...

अथर्ववेद-संहिता – 1:21 – शत्रुनिवारण सूक्त

अथर्ववेद-संहिता॥अथ प्रथमं काण्डम्॥ ९१. स्वस्तिदा विशां पतिर्वृत्रहा विमृधो वशी।वृषेन्द्रः पुर एतु नः सोमपा अभयङ्करः॥१॥ इन्द्रदेव सबका कल्याण करने वाले, प्रजाजनों...

अथर्ववेद-संहिता – 1:20 – शत्रुनिवारण सूक्त

अथर्ववेद-संहिता॥अथ प्रथमं काण्डम्॥ ८७. अदारसृद् भवतु देव सोमास्मिन् यज्ञे मरुतो मृडता नः।मा नो विददभिभा मो अशस्तिर्मा नो विदद् वृजिना द्वेष्या...

अथर्ववेद-संहिता – 1:19 – शत्रुनिवारण सूक्त

अथर्ववेद-संहिता॥अथ प्रथमं काण्डम्॥ ८३. मा नो विदन् विव्याधिनो मो अभिव्याधिनो विदन्।आराच्छरव्या अस्मद्विषूचीरिन्द्र पातय॥१॥ हथियारों द्वारा अत्यधिक घायल करने वाले रिपु...

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